Wednesday, 26 November 2014

KHOL DE DHAKKAN (खोल दे ढक्कन)

  "गीत"

खोल दे ढक्कन, सब तोड़ के बंधन, मत बन बोतल  
चल बहक-बहक, कुछ बहक अब बहक  
खुद को हिला के, जज्बातों की झाग बना के 
अरे हिम्मत की हथेली पर सागर दे उडेल  
चल बहक-बहक................................ 
कमज़ोर नही, तू किसी हाथों की डोर नही  
अब सुन ले दिल की, कुछ पागलपन की  
मत मान किसी की  
खुद को जगा के, दुनिया को हिला के  
आँधी को दे तू मोड़  
चल बहक ................................... 
तेरी हस्ती है क्या, ये सबको बता  
ओ बेफिकर कर अपनी कदर  
बेपरवाह जवानी, लिख नई कहानी  
उठ जा रे उठ जा  
जोश का इक घूँट लगाके  
होश का फिर नशा चढ़ाके  
दो कदम बढ़ा, कुछ हाथ मिला  
पानी को बहा के, थोड़ा रंग जमा के  
पत्थर का सीना चीर  

चल बहक-बहक, कुछ बहक, अब बहक

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