- मैं इतना भर गया कि... मैं खाली हो गया.... =====================================
- अब हमें ना उठाओ कि सूरते हालात से अच्छा है मर जाना ! =====================================
- ये शहर है एक मीठा जहर,
जिसका असर होता है-
धीरे-धीरे ......... ================================ - हम घर से निकले, ख्याल आया..... खुद को भूल के निकले ! =======================================
- मत करो शोर इस तरह कि,
मशीन भी हो जाये हमारी तरह ...... बेदिल, बेअदब, बेहया ! ============================== - तोल दो मुझे कि मुझमें मैं कितना बाकी हूँ......... =================================
- तू आसमां का, वो इस जमीं के,हमें तलाश है इक अदद उफ़्क की........., (उफ़्क = क्षितिज) ===========================================================
- वो शैतान को मारेंगे, ये राक्षस को,
और फिर इन्सान मारा जायेगा .......... =============================== - मेरे ही किरदारों से इक रोज... कत्ल कर दिया जाउँगा मैं, ना मैं खुदा रहा ना कातिब !, (कातिब = लेखक) ====================================================================
- हमें फ़क़त मरना आया, अभी हम इस दुनिया के नहीं ! ===================================
- कुछ यूँ किनारे पे पड़ी थी औंधे मुँह ज़िन्दगी, बेजान खुदा ! तू गिरया था कहीं. ================================================== (गिरया= रोना, विलाप करना, फरियाद)
ज़िन्दगी तेरी जानिब से .........., इक कलम, जरा सी स्याही, कुछ लकीरें, थोड़े अल्फ़ाज और... बहुत सी बदमाशियाँ !
Thursday, 3 March 2016
तोल दो मुझे कि मुझमें मैं कितना बाकी हूँ.........
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