Thursday, 3 March 2016

अब तय करना है...

ये दौर है जुबानों का,
बगैर कोई –
टकराव, पत्थराव, आगजनी या कर्फ्यू,
पर होंगे सब –
आहत, घायल,
बढ़ेंगी –
दूरियाँ, कड़वाहटें और खामोश शोरोगुल ......
अब तय करना है कि हम –

मर के जियेंगे या जी के मरेंगे !


No comments:

Post a Comment