घूमता-फिरता, भागता-दौड़ता,
यहाँ-वहाँ हर रोज,
गलियों में, सड़कों पर,
रिक्शा चलाता, रेढियाँ खींचता,
सब्जियाँ बेचता, दाम तुड़ाता,
कूड़ा बीनता, कचरा उठाता,
देखने में आम, पर सोचो तो,
कितना खास है -
वह आम आदमी I
एड़ियाँ रगड़ता, घिसटता हुआ,
वक्त की दौड़ से बाहर,
दूर-दूर तक कहीं ............,
ढीटता से बढ़ता रहता, फिर भी
जिंदगी के कितना पास है -
वह आम आदमी I
मेहनत करता, पसीना बहाता,
हड्डियाँ तोड़ता, परिवार पालता,
दुःख झेलता, दर्द सहता, सपने देखता,
रोज कमाता, रोज खाता,
माथे पर बल,पर हँसता रहता,
कितना जाबाँज है -
वह आम आदमी I
चलता रहता, चलता रहता,
रात से आँखे मूँदता,
दिन से खोलता हुआ,
थकान पोंछता, दम भरता,
धूल के गर्द खींच कर साँस लेता,
भीड़ में खोता, लेकिन हर चेहरे में,
पहचान बनाता,
कितना आज है –
वह आम आदमी .....I
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