Thursday, 30 July 2015

प्रगति चिन्ह !

मुझे दो वह चिन्ह,
जो बने मेरा मार्गदर्शक –
ऊँचाई हिमालय की, गहराई समुद्र की,
चमकती सफेदी हिमखण्ड सी,
अडिग, अमर, अखण्डित,
सूर्य सारथी अरुण,
ओजस्वी, तेजस्वी, तम नाशक,
ईश्वर वाहक !
महानता अशोक चक्र की,
प्रगतिशीलता काल चक्र की,
अजन्ता सी समलंकृत आकृति,
उत्साह प्रवाहित प्रकृति,
पाखण्ड, आडम्बर हो खण्ड-खण्ड,
पग बाधा का हो शत्रु निरन्तर,
चट्टानी कठोरता, हो वारि तरलता,
पथगामी हो सत्य अनुगामी,
प्रभावहीन जिस पर ऋतु अन्तर,
प्रतिदिन प्रयत्न, दृढ़ निश्चय,
सिद्धान्त सरल –
लक्ष्य भेदना, लक्ष हो विस्मय !
धैर्य, साहस, पराक्रम हो प्रताप की,
गति वेग चेतक सी,
मुझे दो वह –
प्रगति चिन्ह !

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