Monday, 6 July 2015

अश्क़ होते बाकी तो.....

1.    दिल जलता है तो जल जाने दे,
            कि बाहर अँधेरा ही अँधेरा है I

2.    यूँ तो चिराग घर-घर में रोशन होते हैं,
पर किसी-किसी के ही दिल के दिए जलते हैं I

3.    नज़रें ढूँढ लेतीं हैं अँधेरों में भी रोशनी,
नज़र भर के देख तो सही !

4.    हमें कुछ कहने की जरूरत नहीं ऐ जहाँ,
वक़्त खुद ही सुनाएगा हमारी दास्ताँ I

5.    हिम्मत –ए – चिराग  गर रहे रोशन अँधेरों में,
रास्ते खुद ब खुद रूबरू होंगे कारवाँ में  I

6.     राही थका-थका है, मंज़िल भी अभी दूर.....
मुश्किल ही सही, मगर जाना है जरूर I

7.    अश्क़ होते बाकी तो कुछ कतरे बहा लेता अपनी मईय्यत पे,
जो बह गए थे कभी तेरी बेवफ़ाई के साथ I  

8.    दुनिया ने मुझको लूटा अपना कह-कह के,
           दिल मेरा है टूटा अपनों का सह-सह के I

9.    वैसे तो इस दिल पे हर किसी ने चोट की,
           ये तो मेरा दिल है कि हर चोट सह गया I

10. दूर –दूर तक है गीला आसमाँ, जहाँ नज़र जाए ठहर,

            बस वहीं बरस –बरस….

No comments:

Post a Comment