ये अर्जमन्द मुल्क जितना मेरा है,
उतना ही तेरा है ,
फिर क्यूँ हममें बाकी ‘कीना’ है ?
गुमगश्ता है आजकल खुद ही से,
पूछता है पता किसी और का ?
हर शख्स अदम और आशुफ़्ता है,
इस आज़ाद हिन्दुस्तान में .........
रूह घुट रही है क़फ़स में तेरे,
ऐ खुदा, कि अब हमें अत्फ़ बख्श !
यहाँ अव्यवस्था
की व्यवस्था है,
मगर सब
दुरुस्त है !
(अर्जमन्द =महान /, कीना = द्वेष, वैर)
(गुमगश्ता =
खोया हुआ, भटकता हुआ)
( अदम = अस्तित्व हीन, शून्य)
(आशुफ़्ता = घबराया हुआ, बौखलाया हुआ, भ्रमित)
( क़फ़स = शरीर, पिंजरा )
(अत्फ़ = दया, कृपा, प्रेम)
No comments:
Post a Comment